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Bihar Flood News: गंगा के बढ़ते पानी के बीच CM सम्राट की बंगाल के मुख्यमंत्री से बात, फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बात की और फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया।

पटना, 24 अगस्त। बिहार में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। पटना से लेकर भागलपुर और नवगछिया तक निचले इलाकों में पानी का दबाव बढ़ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फोन पर बातचीत कर फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इससे गंगा के पानी के प्रवाह को सुगम बनाने और बिहार में बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इस बातचीत और आग्रह की पुष्टि कई ताजा रिपोर्टों में हुई है।

मुख्यमंत्री ने बंगाल के मुख्यमंत्री को बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर और उससे पैदा हो रही परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होंने फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध करते हुए कहा कि नदी में बढ़ते पानी के बीच जलप्रवाह को आसान बनाना जरूरी है। रिपोर्टों के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी ने इस आग्रह पर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है।

गंगा के बढ़ते पानी ने बढ़ाई चिंता

बिहार में इस समय गंगा के साथ कई प्रमुख नदियों का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है। बिहार जल संसाधन विभाग के रियल-टाइम अलर्ट में 24 अगस्त की सुबह गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। हाथीदह और साहिबगंज में भी गंगा खतरे के निशान से ऊपर बताई गई है। इसके अलावा खगड़िया के बलतारा में कोसी और खगड़िया में बूढ़ी गंडक भी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई हैं।

पटना में गंगा का पानी कई निचले हिस्सों तक पहुंचने लगा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मनेर से मोकामा तक नदी का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है और पटना के कई घाटों पर पानी सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच गया है।

ऐसे हालात में फरक्का बराज की भूमिका को लेकर बिहार सरकार की नजर पश्चिम बंगाल पर टिक गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मानना है कि बराज के गेट खोलने से गंगा का प्रवाह अधिक सुगम हो सकता है और बिहार में बढ़ते जलदबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

फरक्का को लेकर बिहार की चिंता पुरानी

फरक्का बराज को लेकर बिहार की चिंता केवल मौजूदा बाढ़ तक सीमित नहीं है। हाल ही में बिहार सरकार ने फरक्का बराज और गंगा जल प्रबंधन से जुड़े पुराने मुद्दों को केंद्र के सामने भी उठाया था। उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया था कि बिहार की चिंताओं को भारत-बांग्लादेश जल समझौते के नवीनीकरण के दौरान उठाने का आश्वासन केंद्र की ओर से मिला है।

ऐसे में वर्तमान बाढ़ के बीच मुख्यमंत्री की ओर से फरक्का के सभी गेट खोलने की मांग को तत्काल जल प्रबंधन की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से इस आग्रह पर कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है।

कई जिलों में बाढ़ का दबाव

गंगा के बढ़े जलस्तर का असर केवल पटना तक सीमित नहीं है। भागलपुर, मुंगेर, नवगछिया और गंगा के किनारे बसे कई निचले इलाकों में पानी बढ़ने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। कई जगहों पर तटबंध और बांध भी दबाव में हैं।

भागलपुर के नवगछिया में राघोपुर-नरकटिया तटबंध में बड़ा कटाव सामने आया है, जबकि बेगूसराय के बछवाड़ा क्षेत्र में गंगा बाया नदी का जमींदारी बांध टूटने से निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। इन घटनाओं ने गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच तटबंधों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

क्या फरक्का के गेट खुलने से कम होगा बिहार का दबाव?

यह सवाल अब सबसे अहम है। बिहार सरकार का तर्क है कि फरक्का बराज के सभी गेट खोलने से गंगा का प्रवाह सुगम होगा और बिहार में बाढ़ के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, पानी के प्रवाह और बराज संचालन का असर नदी के अलग-अलग हिस्सों में अलग हो सकता है। इसलिए वास्तविक प्रभाव जलस्तर, प्रवाह और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।

इस बीच एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 24 अगस्त को फरक्का बराज के सभी 109 गेट खोले गए और पानी को नियंत्रित तरीके से छोड़े जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस जानकारी को फिलहाल अन्य स्वतंत्र आधिकारिक स्रोत से पुष्ट नहीं किया जा सका है, इसलिए इसे अंतिम स्थिति के रूप में नहीं बल्कि रिपोर्ट किए गए घटनाक्रम के रूप में देखना उचित होगा।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण प्रशासन को निचले इलाकों पर लगातार नजर रखनी पड़ रही है। तटबंधों की निगरानी, प्रभावित परिवारों की पहचान, नावों की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बड़ी प्राथमिकताएं हैं।

बिहार सरकार की फरक्का बराज को लेकर सक्रियता इसी व्यापक बाढ़ प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में बारिश, नदियों के जलस्तर और फरक्का से पानी के प्रवाह में होने वाले बदलाव पर सबकी नजर रहेगी।

फिलहाल बिहार में गंगा का बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फरक्का बराज को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और उसका असर बिहार में गंगा के जलस्तर पर कितना पड़ता है।

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गंगा के पानी पर अब फरक्का की नजर

बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर गंगा के जल प्रबंधन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राज्य के कई इलाकों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है और निचले क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ रहा है।

फरक्का बराज के गेट खोलने की मांग तत्काल राहत की दिशा में बिहार सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसके साथ ही तटबंधों की निगरानी और स्थानीय स्तर पर राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत रखना भी जरूरी है।

बाढ़ का असर केवल पानी बढ़ने तक सीमित नहीं रहता। खेत, सड़क, घर, पशुधन और लोगों की आवाजाही सभी प्रभावित होते हैं। इसलिए अगले कुछ दिन बिहार के लिए बेहद अहम हैं। सरकार और प्रशासन को नदी के जलस्तर के साथ-साथ हर संवेदनशील तटबंध और निचले इलाके पर लगातार नजर रखनी होगी।

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